Jai Ho Vijay Ho
Spiritual & PranYog Healing Centre Bhopal {MP} 462042
23 Oct 2020

सहस्रार चक्र – सम्पूर्ण विश्लेषण { मानसिक समस्याओं का अंत }

सहस्रार चक्र : सम्पूर्ण विश्लेषण

https://youtu.be/w5-eGSWfwPc

हमारा शरीर अनेक रहस्यों से भरा पड़ा है | जिसमे 7 प्रमुख ऊर्जा स्रोत है , जिनमे सातवां सहस्रार चक्र है , जो आकाश तत्त्व को समाहित किये हुए है सहस्रार चक्र है, जो चेतना का प्रतीक है। सहस्रार चक्र के प्रतीक चित्र में असंख्य पंखुडिय़ों वाला एक कमल है। ध्यान में जब व्यक्ति की चेतना आकाश में समाहित हो जाती है, हमें ज्ञान और बुद्धि प्राप्त होती है। सहस्रार चक्र : स्थिति यह सर के सबसे ऊँचे भाग पर स्थित होता है और इससे मस्तिष्क का सम्पूर्ण भाग जुड़ा होता है | सहस्रार चक्र मस्तिष्क के ऊपर ब्रह्मरंध में अपस्थित 6 सेंटीमीटर व्यास के एक अध खुले हुए कमल के फूल के समान होता है। ऊपर से देखने पर इसमें कुल 972 पंखुड़ियां दिखाई देता है। इसमें नीचे 960 छोटी-छोटी पंखुड़ियां और उनके ऊपर मध्य में 12 सुनहरी पंखुड़ियां सुशोभित रहती हैं। इसे हजार पंखुड़ियों वाला कमल कहते हैं।

☘️ इसका चिन्ह खुला हुआ कमल का फूल है जो असीम आनन्द के केन्द्र होता है। इसमें इंद्रधनुष के सारे रंग दिखाई देते हैं लेकिन प्रमुख रंग बैंगनी होता है। इस चक्र में “अ ” से ” क्ष ” तक की सभी स्वर और वर्ण ध्वनि उत्पन्न होती है।

🔘पिट्यूट्री और पिनियल ग्रंथि का आंशिक भाग इससे सम्बंधित है। यह मस्तिष्क का ऊपरी हिस्सा और दाई आंख को नियंत्रित करता है। यह आत्मज्ञान, आत्मदर्शन, एकीकरण, स्वर्गीय अनुभूति के विकास का मनोवैज्ञानिक केन्द्र है।

🔘यह आत्मा का उच्चतम स्थान है। इस चक्र को देख कर व्यक्ति के स्वभाव और चरित्र का अनुमान लगाया जा सकता है। इसका विस्तार, रंग, गति, आभा और बनावट देख कर व्यक्ति की चैतन्यता, आध्यात्मिक योग्यता और अन्य चक्रों से समन्वय का अनुमान लगाया जा सकता है।

🔘अच्छा योगाभ्यास करने वाले साधक का चक्र ओजस्वी और चमकदार होता है। सच्चे स्वप्न देखने की क्षमता विकसित हो जाती है। यदि इस चक्र में लचीलापन है तो इसका मतलब है कि व्यक्ति आसानी से अपनी आत्मा को शरीर से निकाल कर कहीं अन्यत्र ले जा सकता है।

✡️🏴 नीचे के बाकी 6 चक्रों से बिलकुल अलग यह एक अति विशिष्ट और उन्नत चक्र है। यह ईश्वरधाम और मोक्ष का द्वार है। जब यह चक्र अच्छी स्थिति में है तो अन्य चक्र स्वतः जागृत हो जाते हैं। जो साधक अपनी कुण्डलिनी जाग्रत कर लेते हैं तो कुण्डलिनी बाल रूप बाला त्रिपुरा सुन्दरी के रूप में ऊपर उठती है। थोड़ा और ऊपर पहुंचने पर वह यौवन को प्राप्त कर राजराजेश्वरी का रूप धरती है और सहस्रार चक्र तक वह संपूर्ण स्त्री ललिताम्बिका का रूप धर लेती है।

🏴 जो साधक कुण्डलिनी को सहस्रार तक ले कर आते हैं, वे परमानन्द को प्राप्त करते हैं, जिसकी सर्वोच्च अवस्था समाधि है। कुण्डलिनी के इस जागरण को शिव और शक्ति का मिलन कहते हैं। इस मिलन से आत्मा का अस्तित्व खत्म हो जाता है और वह परमात्मा में लीन हो जाती है। इस चक्र पर ध्यान करने से संसार में किये गये बुरे कर्मों का भी नाश होता है। ऐसे साधक अच्छे कर्म करने और बुरे कर्मों का नाश करने में सफल हो जाते हैं।

🏴 आज्ञा चक्र को सम्प्रज्ञात समाधि में जीवात्मा का स्थान कहा जाता है, क्योंकि यही दिव्य दृष्टि का स्थान है। उसे शिव की तीसरी आंख भी कहते हैं। मूलाधार से लेकर आज्ञा चक्र तक सभी चक्रों के जागरण की कुंजी सहस्रार चक्र के पास ही है। यही सारे चक्रों का मास्टर स्विच है।

✡️यह वास्तव में चक्र नहीं है बल्कि साक्षात तथा सम्पूर्ण परमात्मा और आत्मा है। जो व्यक्ति सहस्रार चक्र का जागरण करने में सफल हो जाते हैं, वे जीवन मृत्यु पर नियंत्रण कर लेते हैं। सभी लोगों में अंतिम दो चक्र सोई हुई अवस्था में रहते हैं। अतः इस चक्र का जागरण सभी के वश में नहीं होता है। इसके लिए कठिन साधना व लम्बे समय तक अभ्यास की आवश्यकता होती है।

मंत्र : ” ॐ ”

वाधित या असंतुलन का परिणाम

इसका संतुलन बिगड़ने पर अनिद्रा , तनाव , अवसाद , सिरदर्द, मानसिक रोग, नाड़ीशूल, मिर्गी, मस्तिष्क रोग, एल्झाइमर, त्वचा में चकत्ते आदि रोग होते हैं। सहस्रार चक्र को संतुलित करने के उपायअगर आप सहस्रार चक्र को संतुलित कर लेते है, तो आपकी समस्या का अपने आप समाधान हो जाता है , इसकी विधियाँ निम्न लिखित है |

1 . चक्र ध्यान

सर्वप्रथम किसी भी आसन में बैठ जाये, या पीठ के बल लेट जाएँ , फिर बारह बार लम्बी गहरी साँस लें , फिर सहस्रार चक्र पर ध्यान लगाये और यूट्यूब पर सहस्रार चक्र ध्यान साधना की ध्वनि को चालू करके , उस ध्वनि को सहस्रार चक्र पर महसूस करें |

अवधि

कम से कम 15 मिनिट ध्यान करें |

2 . चक्र साधना – सहस्रार चक्र को संतुलित करने का ध्यान और साधना अलग अलग है | ध्यान के आपको सहस्रार चक्र सिर्फ ध्यान लगाना है, और धवनि महसूस करनी है,

साधना समय – सहस्रार चक्र का समय सुबह 3 बजे से 7 बजे तक होता है, इस समय की गयी साधना विशेष फलदायी होती है |

अवधि – कम से कम 21 दिन और अधिकतम 3 माह तक इस साधना को करने से मनवांछित परिणाम मिलते है |

महान वैज्ञानिक निकोलो टेस्ला ने लिखा है “If you want to find the secrets of the universe, think in terms of energy, frequency and vibration.” ― Nikola Tesla

23 Oct 2020

कब्ज से मुक्ति – तुरंत असरकारक

कब्ज से मुक्ति – तुरंत असरकारक

प्राण योग ध्यान को सुनना शुरू कीजिये ,सीधे आसमान की तरफ मुँह करके लेट जाएँ हथेलियां आसमान की तरफ अधखुली हो , शरीर को शिथिल छोड़ दीजिये , आँखे बंद कीजिये , अब दाएं हाथ के अंगूठे से अपनी दांयी नाक के नथुने को बंद कीजिये , और बाएं नथुने से साँस खींचते हुए यह कल्पना कीजिये की प्राण ऊर्जा आपके मणिपुर चक्र { नाभि } में आ रही है , जो आपकी कब्ज सहित समस्त समस्याओं को ठीक करने जा रही है , साँस को रोककर रखिये , जब तक घबराहट न होने लगे , साँस को रोके रखिये , फिर दाएं नथुने से बाहर निकल दीजिये | अब बाएं नथुने को अनामिका अंगुली से बंद कीजिये , दायें नथुने से साँस खींचिए , और रोक कर रखिये , जब तक आपको घबराहट न होने लगे , अब बाएं से छोड़िये , आपको जिस तरफ से साँस लेना है, उसके विपरीत तरफ से छोड़ना है , और जिस तरफ से आपने साँस छोड़ी है, उसी तरफ से आपको लेनी है | ऐसा 9 बार करें , हर बार ज्यादा देर तक साँस रोकने का अभ्यास करें , फिर शरीर को शिथिल छोड़ दें , कब्ज मुक्ति प्राण योग ध्यान मैडिटेशन की ध्वनि को आपने मणिपुर चक्र { नाभि } पर महसूस करे | अब आँखे खोल लीजिये , यह ध्यान सुबह के समय 5 बजे से 7 बजे तक करने से बहुत अच्छे परिणाम मिलते है | और हा, अपनी प्रतिक्रिया , देना न भूलें , मुझे इंतजार रहेगा |

Sticky
16 Oct 2020

अग्नि तत्त्व का संतुलन द्वितीय

अग्नि तत्त्व का संतुलन द्वितीय

पञ्च तत्वों का रहस्यमयी संसार
=============================
महोदय / महोदया , आपका अग्नि तत्त्व असंतुलित होने के कारण आपको सम्बंधित समस्या / समस्यायें हो रही है | इसे ठीक करने के लिए कृपया आपको निम्न लिखित उपायों का पालन करना अनिवार्य है |
1. तर्जनी , { Index Finger }  के बीचों बीच नीला रंग लगाये , दोनों हाथों की अँगुलियों , दोनों तरफ़ ,दिन में तीन बार रंग लगायें , रोग के पूरी तरह ठीक होने तक लगायें | इसके लिए आप नीला पेन या स्केच पेन का प्रयोग कर सकते है { चित्र में दिए गये अनुसार }


2 . प्रतिदिन सूर्योदय से पहले सोकर उठ जाये, और नंगी आँखों से ऊगते हुए सूर्य को देखें |
3 . प्रतिदिन सुबह 7 बजे से 11 बजे तक भोजन अवश्य कर लें |
4 . प्रतिदिन कम से कम 21 मिनिट्स प्राण योग चक्र ध्यान जरूर करें |
5 .समय – समय पर अपने शूक्ष्म शरीर की सफ़ाई करते रहे | अर्थात आभा मंडल की सफाई और उसको बढ़ाने के प्रयास करें |
6. आज्ञा चक्र को संतुलित करने हेतु प्राण योग ध्यान करें |
7 . अग्नि मुद्रा का अभ्यास करे, |
8 . अग्नि तत्त्व को बढ़ाने वाले पदार्थ जो आपको पसंद हो, जैसे लहसुन , अदरक , तेज पत्ता, जायफल , लौंग, काली मिर्च , मसालेदार खाना , आदि का प्रयोग कुछ समय तक बंद कर दें |

ग्नि तत्व के अंग – मस्तिष्क , मेरुदंड
संवेदी अंग – जननांग, नर्वस सिस्टम
मौसम – गर्मी
समय –  शाम 7 बजे से रात्रि 11 बजे तक
महीने – मई , जून
रंग –नारंगी, संतरा , गुलाबी
स्वाद – कड़वा
स्वभाव – जोश , उत्तेजना , उमंग , मौज मस्ती
ध्वनि – तेज हंसी
आयु–  24 से 36 वर्ष
चक्र –  आज्ञा चक्र
ऊर्जा – उग्र गर्मी
गुण – जोशीला , क्रियाशील

अग्नि तत्व की बीमारियाँ

शारीरिक समस्यायें

अप्पर मोटोर न्यूरॉन डिजीज लोअर मोटोर न्यूरॉन डिजीज लकवा , पार्किन्सन , गर्भाशय में गाँठे , ब्रेस्ट टयूमर , मिर्गी , रेटीना की समस्या , ट्रिजेमिनल न्यूराग्लिया , तकलीफ़दायक मासिक धर्म , फ़िब्रोइडस , रक्तस्राव , उल्टियाँ , कन्धों में दर्द , हाथ -पैरों में दर्द , गर्दन में दर्द , भूख़ में कमी , मानसिक और शारीरिक थकान

मानसिक समस्याएं

लापरवाह , सिद्धांतवादी , घमण्डी , भ्रमित रहना , गुस्सा आना , चिड़चिड़ापन , ग़ैर जिम्मेदार , नकारात्मक विचार , बात -बात पर उत्तेजित हो जाना , सहनशीलता का अभाव |

योगी योगानंद { आध्यात्मिक गुरू , एवं प्राण योग के प्रणेता }

Sticky
13 Oct 2020

पृथ्वी तत्त्व का संतुलन

पृथ्वी तत्त्व का संतुलन
पञ्च तत्वों का रहस्यमयी संसार
==================

महोदय / महोदया , आपका पृथ्वी तत्त्व असंतुलित होने के कारण आपको सम्बंधित समस्या / समस्यायें हो रही है | इसे ठीक करने के लिए कृपया आपको निम्न लिखित उपायों का पालन करना अनिवार्य है
1 . मध्यमा , { Middle Finger } में अँगूठे तरफ हरा रंग लगाये , दोनों हाथों की अँगुलियों , दोनों तरफ़ ,दिन में तीन बार रंग लगायें , रोग के पूरी तरह ठीक होने तक लगाते रहे, यह रंग आप स्केच पेन से लगा सकते है | { चित्र में दिए गये अनुसार }

2. प्रतिदिन कम से कम 30 मिनिट्स नंगे पैर जमीन या घास पर चलें |
3. पृथ्वी मुद्रा का अभ्यास करें |
4 . मणिपुर चक्र की साधना करें |
5 . पृथ्वी तत्त्व की साधना करें |
6 . समान नामक प्राण का ध्यान करें |

पृथ्वी तत्व के अंग – अमाशय , पेन्क्रियाज , स्पलीन
संवेदी अंग – मुँह , ओंठ , मसलस
मौसम – बरसात
दिन का समय – सुबह 7 बजे से 11 बजे तक { सुबह 4 घण्टे पृथ्वी तत्त्व चलता है }
महीने – जुलाई , अगस्त
रंग – पीला
स्वाद – मीठा
स्वभाव – सुस्ती , फैलाव , समझदारी
ध्वनि – सिंगिंग
आयु –36 से 48 वर्ष तक जीवन में पृथ्वी तत्त्व का समय होता है |
चक्र – मणिपुर चक्र
ऊर्जा – आद्रता

पृथ्वी तत्त्व के गुण

लोचकता प्रदान करना
खुरदरापन
भारीपन
कठोरता
थामने की शक्ति
सहनशीलता
आधार प्रदान करना
भरण पोषण करना
पृथ्वी तत्व की बीमारियाँ –

शारीरिक

शरीर में सूजन आना
मलेरिया
टॉन्सिस
मोटोर न्यूरॉन डिजीज
डायबिटीज
फ्रोज़ेन शोल्डर
लंबर कम्प्रेशन
भूख की कमी
कब्ज
जुकाम
फ़ूड पोइसीनिंग
जोड़ों में दर्द
मोटापा
एड़ी में दर्द
गैस्ट्रिक
उल्टियाँ
पेट दर्द
पैरों में कमजोरी
पैरों में सुन्नपन
शरीर के अंगो में प्राण शक्ति की कमी
एसिडिटी
ट्रीजमीनल न्यूरोग्लिआ
पिंपल्स
थकान लगना
शरीर का तापमान अधिक रहना
ओंठो का फटना
डायरिया
पाचन तंत्र की ख़राबी
गले में तकलीफ
म्यूकस मेम्ब्रेन में सूजन

मानसिक समस्याऐं

बात बात पर दुखी हो जाना
छोटी छोटी बात की चिंता करना
सोचने की काम शक्ति

योगी योगानंद { आध्यात्मिक गुरू , एवं प्राण योग के प्रणेता }

Sticky
12 Oct 2020

जल तत्त्व का संतुलन

जल तत्त्व का संतुलन
पञ्च तत्वों का रहस्यमयी संसार
जल तत्त्व का संतुलन –
महोदय / महोदया , आपका जल तत्त्व असंतुलित होने के कारण आपको सम्बंधित समस्या / समस्यायें हो रही है | इसे ठीक करने के लिए कृपया आपको निम्न लिखित उपायों का पालन करना अनिवार्य है |
1 . मध्यमा , { Middle Finger } में छोटी अँगुली तरफ पीला रंग लगाये , दोनों हाथों की अँगुलियों में , दोनों तरफ़ ,दिन में तीन बार रंग लगायें , रोग के पूरी तरह ठीक होने तक लगायें | यह पीला रंग आप स्केच पेन से भी लगा सकते है, अगर हल्दी का प्रयोग करेगे तो ज्यादा जल्दी अच्छे परिणाम मिलते है | { चित्र में दिए गये अनुसार }                                   
2 . रात्रि में तांबे के बर्तन में पानी भरकर रखे, सुबह सबसे पहले खाली पेट पियें |
3. पानी को प्राण ऊर्जा युक्त बनाकर पियें , इससे शरीर के समस्त रोग कुछ समय में ही ठीक हो जाते है |
4. छह महीने से जिन परिचित लोगों से बात नहीं की है, उनसे बात करना शुरू करें |
5. घर से बाहर जाकर लोगों से जान – पहचान बढ़ायें |
6. किसी की शिकायत न करें और न ही किसी से अनुरोध करें |
7. रात्रि के समय अपने बिस्तर के पास स्वच्छ जल से भरकर कोई बर्तन जरूर रखें |
8. नदी , झील , तालाब , समुद्र में स्नान जरूर करें |
9. जल तत्व का ध्यान करें |
10. जल का संरक्षण करें , फालतू न बहायें |
11. मूलाधार चक्र का ध्यान करें , उसकी फ़्रिक्वेन्सी का संगीत सुनें |
12. शनि ग्रह की पूजा अर्चना करें |
13 . प्राण योग जल तत्त्व ध्यान करें |
14. घूंट – घूंट पानी पियें |

जल तत्व की महत्वपूर्ण जानकारी

ल तत्व के अंग – किड़नी , मूत्राशय
संवेदी अंग – कान , अस्थियाँ ,नाख़ून
मौसम – शीत ऋतु
दिन का समय – दोपहर 3 बजे से शाम 7 बजे तक |
महीने – नवम्बर , दिसम्बर
रंग – नीला , काला
स्वाद – नमकीन
स्वभाव – डर और चिन्ता
ध्वनि – कराहने की आवाज़
गन्ध – सड़ा हुआ
आयु – 60 से वर्ष मृत्यु पर्यन्त तक
चक्र – मूलाधार चक्र
ऊर्जा – शीतलता

जल तत्त्व का शरीर में स्थान
जल
रक्त
बसा { फैट }
मूत्र
लार
बीर्य

जल तत्व की बीमारियाँ –

शारीरिक

बालों की रूसी
स्मरण शक्ति की कमी
शरीर पर झुर्रियाँ
सर्दी -जुकाम
ओस्टेओ आर्थराइटिस
ओस्टेओ पोरोसिस
कार्टीलेज का घिसना
रीढ़ की अस्थि में समस्या
रक्त की कमी
गंजापन
बालों का सफ़ेद होना
कानों की समस्या
प्रोस्ट्रेट
किड़नी की समस्या
रात में बार -बार पेशाब आना
मुँह का सूखना
थकान
कमज़ोरी
घुटनों की तकलीफ
साइनस
प्रजनन सम्बन्धी रोग
अचानक चोट लगना
मसल्स में दर्द
सर दर्द
आँखों में दर्द
आँसू आना
निम्न रक्त चाप
शरीर में कड़ापन
कूल्हे में दर्द

मानसिक समस्याऐं

अवसाद
विचारों की अस्पष्टता
अकेलापन
असुरक्षा
गुस्सा आना
नींद न आना
भुलक्कड़
सपने आना
हीनता की भावना
भय
जीवन से बिलगाव
सामाजिक दूरी

योगी योगानंद { आध्यात्मिक गुरू , एवं प्राण योग के प्रणेता }

Sticky
09 Oct 2020

अग्नि तत्त्व का संतुलन प्रथम

अग्नि तत्त्व का संतुलन
पञ्च तत्वों का रहस्यमयी संसार
=============================
महोदय / महोदया , आपका अग्नि तत्त्व असंतुलित होने के कारण आपको सम्बंधित समस्या / समस्यायें हो रही है | इसे ठीक करने के लिए कृपया आपको निम्न लिखित उपायों का पालन करना अनिवार्य है |
1. तर्जनी , { Index Finger } में छोटी अंगुली की तरफ नीला रंग लगाये , दोनों हाथों की अँगुलियों , दोनों तरफ़ ,दिन में तीन बार रंग लगायें , रोग के पूरी तरह ठीक होने तक लगायें | इसके लिए आप नीला पेन या स्केच पेन का प्रयोग कर सकते है { चित्र में दिए गये अनुसार }


2 . प्रतिदिन सूर्योदय से पहले सोकर उठ जाये, और नंगी आँखों से ऊगते हुए सूर्य को देखें |
3 . प्रतिदिन सुबह 7 बजे से 11 बजे तक भोजन अवश्य कर लें |
4 . प्रतिदिन कम से कम 21 मिनिट्स प्राण योग चक्र ध्यान जरूर करें |
5 .समय – समय पर अपने शूक्ष्म शरीर की सफ़ाई करते रहे | अर्थात आभा मंडल की सफाई और उसको बढ़ाने के प्रयास करें |
6. विशुद्धि चक्र को संतुलित करने हेतु प्राण योग ध्यान करें |
7 . अग्नि मुद्रा का अभ्यास करे, |
8 . अग्नि तत्त्व को बढ़ाने वाले पदार्थ जो आपको पसंद हो, जैसे लहसुन , अदरक , तेज पत्ता, जायफल , लौंग, काली मिर्च , मसालेदार खाना , आदि का प्रयोग कुछ समय तक बंद कर दें |

अग्नि तत्व के अंग – ह्रदय , छोटी आंत
संवेदी अंग – जीभ , रक्त वाहिनियां
मौसम – गर्मी
दिन का समय – सुबह 11 बजे से दोपहर 3 बजे तक
महीने – मार्च , अप्रैल
रंग –लाल
स्वाद – कड़वा
स्वभाव – जोश , उत्तेजना , उमंग , मौज मस्ती
ध्वनि – तेज हंसी
आयु–  12 से 24 वर्ष
चक्र –विशुद्धि चक्र
ऊर्जा – गर्म
गुण – वृद्धि , विकास , जोशीला , क्रियाशील , जीवन में कुछ पाने की लालसा

अग्नि तत्व की बीमारियाँ

शारीरिक बीमारियां

  1. कोलेस्ट्रॉल
  2. हीमोफीलिया
  3. ब्लड प्रेशर
  4. हृदय रोग
  5. सर्वाइकल
  6. स्पॉन्डिलाइसिस
  7. वेरिकोस वेन्स
  8. इंसोम्निया
  9. हाइपो थाइरोइड
  10. कब्ज़
  11. बबासीर
  12. कार्पल टर्नल सिंड्रोम
  13. कन्धा और ह्रदय में दर्द
  14. शरीर का तापमान घटना , बढ़ना वृद्धि में रूकावट
  15. रक्त संचरण सम्बन्धी समस्या
  16. मायग्रेन
  17. अलसर
  18. गर्दन में दर्द
  19. जबड़े में सूजन
  20. वज़न में कमी आना
  21. उल्टियाँ होना
  22. दस्त होना
  23. ठण्ड ज्यादा लगना

मानसिक बीमारियां

ईर्ष्यालु प्रवृत्ति
बेबाक बोलने की आदत
उचित -अनुचित का विचार किए बिना जबाब देना
बिना सोचे -बिचारे बोलना
हिस्टीरिया
अनियन्त्रित इच्छायें
नशे की प्रवृत्ति

योगी योगानंद { आध्यात्मिक गुरू , एवं प्राण योग के प्रणेता }

Sticky
09 Oct 2020

वायु तत्त्व का सन्तुलन

पञ्च तत्वों का रहस्य

विशेष –वायु तत्त्व की रोग प्रतिरोधक शक्ति शून्य होती है, फलस्वरूप ऐसे व्यक्ति कोरोना के चपेट में जल्दी आ रहे है, और वायु तत्त्व का अंग लीवर है, लीवर के प्रभावित होने से शरीर से विषैले पदार्थों का निष्कासन नहीं हो पाता , फलस्वरूप व्यक्ति की रोग प्रतिरोधक शक्ति समाप्त या कम हो जाती है और व्यक्ति आसानी से कोरोना वायरस का शिकार हो जाता है |

वायु तत्व के अंग – लीवर , गाल ब्लैडर
संवेदी अंग – आँख , मसल्स , जोड़ , साइनस , टेंडन
दिन का समय – रात्रि 11 बजे से सुबह 3 बजे तक |
महीने – जनवरी , फरवरी
रंग – हरा
स्वाद –खट्टा
स्वभाव – चंचलता

ध्वनि –चिल्लाना {Shouting}
गन्ध – {Rancid}
आयु – 0 से 12 वर्ष
चक्र – अनाहत चक्र
ऊर्जा –वायु { Air}
वायु तत्व की बीमारियाँ –

शारीरिक
1. कमजोरी
2 . शरीर में कड़ापन
3 . श्वेत प्रदर
4 . एलर्जी
5 . लीवर सोराइसिस
6 . हेपेटाइटिस
7 . भूख न लगना
8 . पीलिया
9 . हार्मोन्स की समस्या
10 . उल्टियाँ होना
11 . आँखों की समस्या ‘
12 . गठिया
13 . कफ
14 . खॉंसी
15 . कोलेस्ट्राल
16 . कम दिखाई देना
17 . आर्थराइटिस
18 . मस्क्युलर डिस्ट्रॉफी
19 . सर दर्द
20 . पीठ दर्द
21 . पेशाब में तकलीफ
22 . मासिक धर्म की अनियमितता
23 . थकान
24 . एंजायटी
25 . कमर दर्द
26 . सर्वाइकल
27 . सायटिका
28 .माइग्रेन
29 . उच्च रक्तचाप

मानसिक समस्यायें

हमेशा आक्रामक रहना
निराशा की भावना
जल्दी गुस्सा हो जाना
संयम का अभाव
मूड स्विंग
एकाग्रता की कमी
भूलने की बीमारी
हमेशा शिकायत करना
हमेशा लड़ने की प्रवृति
जल्दी उत्तेजित हो जाना , और जल्दी शान्त भी हो जाना

वायु सन्तुलन से होने वाले लाभ

उद्देश्य की प्राप्ति
व्यवसाय में सफलता
कैरियर में सफलता

वायु तत्त्व के असंतुलित होने से विवाह सम्बन्ध में परेशानी आती है
लोगों से सम्पर्क की कुशलता उत्पन्न करता है |
परीक्षा में सफलता
प्रेम की भावना का विकास
स्वास्थ में वृद्धि
सम्मान दिलाता है ‘
ज्ञान में बृद्धि
भाग्य बहुत तेजी से बदलता है |
स्मरण शक्ति में वृद्धि
शान्ति का वातावरण निर्मित करता है |
सम्पत्ति में बहुत तेजी से वृद्धि होती है |
जनता को संबोधित करने की प्रवृति पैदा होती है |
मष्तिष्क को शान्त करता है |
बुरी आदतों में मुक्ति मिलती है |

वायु तत्त्व को सन्तुलित करने के उपाय

महोदय / महोदया , आपका वायु तत्त्व असंतुलित होने के कारण आपको सम्बंधित समस्या / समस्यायें हो रही है | इसे ठीक करने के लिए कृपया आपको निम्न लिखित उपायों का पालन करना अनिवार्य है |

  1. प्राण योग प्राणायाम करें |
  2. लीवर की जीवनी शक्ति बढ़ाने के लिए प्राण शक्ति का प्रयोग करें |
  3. सभी प्रकार के प्राणायाम जरूर करें |
  4. प्रतिदिन सूर्योदय से पहले सोकर उठ जाये, और 30 मिनिट्स तक तेज़ गति से टहलें | इस दौरान लम्बी गहरी साँस लें |
  5. प्रतिदिन सुबह 7 बजे से पहले अपने दैनिक क्रियाकलाप से मुक्त हो जायें |
  6. प्रतिदिन कम से कम 21 मिनिट्स प्राण योग प्राणायाम जरूर करें |
  7. समय पर अपने शूक्ष्म शरीर की सफ़ाई करते रहे |

8.आकाश और पृथ्वी तत्त्व की वृद्धि के प्रयास करें |
9 . वायु मुद्रा का अभ्यास जरूर करे, |
10. बीच की अँगुली , { Middle Finger } में बीच में कत्था रंग लगाये , दोनों हाथों की अँगुलियों , दोनों तरफ़ ,दिन में तीन बार रंग लगायें , रोग के पूरी तरह ठीक होने तक लगायें |

योगी योगानंद { आध्यात्मिक गुरू , एवं प्राण योग के प्रणेता }

Sticky
09 Oct 2020

आकाश तत्त्व का संतुलन –

पञ्च तत्वों का रहस्यमयी संसार
==================

विशेष – आकाश तत्त्व की रोग प्रतिरोधक शक्ति शून्य होती है, फलस्वरूप ऐसे व्यक्ति कोरोना के चपेट में जल्दी आ रहे है, और आकाशतत्त्व का अंग फेफड़े है, इसलिए फेफड़ों के क्षतिग्रस्त {Damaged } होने की संभावना सर्वाधिक होती है |

आकाश तत्व के अंग – फेफड़े और बड़ी आँत
संवेदी अंग – सुगंध { नाक } , स्पर्श { त्वचा }
मौसम – शरद , पतझड़
दिन का समय – सुबह 3 बजे से सुबह 7 बजे तक |
महीने – सितम्बर , अक्टूबर
रंग – सफ़ेद , कत्था रंग , सिलेटी
स्वाद – कसैला { सेम , अनार } कड़वा
स्वभाव – उदासीन , रूखापन , शोक , चिड़चिड़ापन |
ध्वनि – रोने की आवाज { Weeping }
गन्ध – सड़ी वस्तुओं की तरह { Rotten }
आयु – 48 से 60 वर्ष
चक्र – स्वाधिष्ठान चक्र
ऊर्जा – शुष्क {ड्राई }
आकाश तत्व की बीमारियाँ

शारीरिक

  1. वायरस से संक्रमण
  2. गंजापन { बालों का गिरना , टूटना , झड़ना }
  3. . त्वचा रोग { एक्जिमा , सोराइसिस , फोड़े , फुंसिया , रूखापन , त्वचा का फटना }
  4. . नासिका रोग { साइनस , सर्दी , नाक से खून आना , एलर्जी ,
  5. सर्वाइकल
  6. लिगामेन्ट का टूटना
  7. न्यूरॉन समस्या
  8. ऑस्टिओ आर्थराइटिस
  9. डिस्क प्रोब्लेम
  10. श्वसन सम्बन्धी रोग
  11. शरीर का तापमान अधिक होना
  12. कफ बनना
  13. अस्थमा
  14. पीठ और कंधा दर्द
  15. सीने में दर्द
  16. कब्ज
  17. अपेन्डिक्स
  18. कोलाइटिस
  19. बबासीर
  20. पायरिया
  21. मसूढ़ों की समस्या
  22. सर दर्द
  23. पेट दर्द
  24. अँगुलियों में दर्द
  25. कमजोरी महसूस होना
  26. पैरों में कमजोरी महसूस होना

मानसिक समस्याऐं

  1. जीवन से मोह भंग होना
    2 . अवसाद का शिकार
    3 . टालने की प्रवृति
    4 . आलस्य
    5 . थकान
    6 .जल्दी भयभीत हो जाना

आकाश तत्त्व के गुण

शीतप्रधान
प्रतिरोधी शक्ति का अभाव { जल्दी संक्रमण का ख़तरा }
घेरने का गुण
हल्कापन
चिकनापन
मुलायम
सुगंध का अभाव
शरीर में फेफड़े , बडी आँत , त्वचा , बाल के रूप में उपस्थिति

आकाश तत्त्व का संतुलन –
महोदय / महोदया , आपका आकाश तत्त्व असंतुलित होने के कारण आपको सम्बंधित समस्या / समस्यायें हो रही है | इसे ठीक करने के लिए कृपया आपको निम्न लिखित उपायों का पालन करना अनिवार्य है |

1.प्राण योग प्राणायाम करें |
2.फेफड़ों की जीवनी शक्ति बढ़ाने के लिए प्राण शक्ति का प्रयोग करें |
3.सभी प्रकार के प्राणायाम करें |

4.प्रतिदिन सूर्योदय से पहले सोकर उठ जाये, और नंगी आँखों से ऊगते हुए सूर्य को देखें |
5 . प्रतिदिन सुबह 7 बजे से पहले अपने दैनिक क्रियाकलाप से मुक्त हो जायें |
6 . प्रतिदिन कम से कम 21 मिनिट्स प्राण योग ध्यान जरूर करें |
7.समय पर अपने शूक्ष्म शरीर की सफ़ाई करते रहे |
8. वायु और अग्नि तत्त्व की वृद्धि के प्रयास करें |
9 . आकाश मुद्रा का अभ्यास करे, |
7 . तर्जनी , { Index Finger } में अँगूठे की तरफ लाल रंग लगाये , दोनों हाथों की अँगुलियों , दोनों तरफ़ ,दिन में तीन बार रंग लगायें , रोग के पूरी तरह ठीक होने तक लगायें | { चित्र में दिए गये अनुसार }

योगी योगानंद { आध्यात्मिक गुरू , एवं प्राण योग के प्रणेता }

29 Sep 2020

Increase your height through yoga       

Ever wanted to be taller? Do you understand the that much at the age of 25, you can significantly augment taller? What leads it significantly bigger is that you can do it naturally and safely. Here, most info and exercises will be handed out to appreciation rate regardless of age. There are a lot of ways to increase height naturally. Increasing the levels of growth hormones in the body is one of the most important things. And if you are a teenager, you need not worry about this because it is at this point that you produce growth hormones in large quantities and automatically.

For those aged above 20 on the other hand will need to force the production of their growth hormone. One great way to do this is through stretching exercises. Stretching is very essential in increasing height naturally since stretching produces lactate which is an important factor in making the production of the growth hormone active. When the growth hormone levels of the body are increase, this will make the body’s cartilages thicker and the density levels of the bone which results to height gain.

Combining a right diet and the stretching exercises will even be more effective. Eating right will help strengthen your bones which can help in lengthening your bones. The foods that are useful in increasing height are fiber rich foods like wheat brans, wheat, rice, oats and the like. Increase Height After 25

Among these foods, the other foods that are beneficial in growing taller are vegetables such as, spinach, carrots, salad greens, and broccoli. Steamed fish and citrus fruits are also helpful. While these food promote height gain, you will need to avoid foods that are high in fats and sweets. Also lessen your alcohol and coffee intakes. On top of the stretching exercises, yoga is also a type of exercise that promotes height gain.

It promotes balance and flexibility at the same time releases the strain and tension on the back and the spine which helps in making the cartilage of your body thicker and the muscles stronger. Yoga is also useful in promoting good posture which stretches the spine. The different yoga positions that can help in increasing one’s height are Tadasana, Sheershasana and the Matsyasana. And one thing that you should always keep in mind to be taller is by getting enough rest as this allows your body to promote the growth hormone appropriately.

Studies have shown that larger quantities of growth hormone are produced while sleeping. It would be better to sleep longer than the usual to help stimulate and increase the production of the growth hormones in your body. Before anything else or before you try these exercises out to increase your height naturally, it is best that you consult your doctor first to make sure that you are healthy enough to do so. With the proper discipline and persistence and these exercises, gaining height will be very easy.

Yogic cure:-

[1] Shatkarma                                    {Purificatory techniques}

{a}Trataka                                            {Eye-gazing for focussing purifying mind}

{b}Kapal-bhati                                     {Lungs &brain wash by breathing}

[2] Yogasanas                                                      {Posture}

{a} Yastikasana                                       { }

{b} Tadasana                                            {Palmyra}

{c} Padmasana                                         {Lotus }

{d} Pervatasana                                        {Mountain}

{e}  Trikonasana                                      {Tringle}

{f} Kornasana                                          {      }

{g} Garunasana                                       {Eagle}

{h}  Sirshasana                                        {Head stand}

{i}   Halasana                                           {Plough}

{j}  Paschimottanasana                            {Posterior strech}

{k} Vrikchasana                                       {Tree  posture}

{l}  Uttanpadasana                                   {Foot  lifted}

{m} Setubandhasana                                {Brigde posture}

{n} Bhujangasana                                     {Cobra}

{o} Dhanurasana                                       {Bow}

{p} Chakrasana                                          {Wheel}

{q}  Padhastasana                                       {Foot & hand}

{r} Utktasana                                              {Half stand}

{s} Shavasana                                             {Corpse}

{t} Gatiman padhast-chakrasan                  {Moving hand foot wheel}

 [3]Pranayama                                    {Body-mind energising breathing practices}

{a} Bhramari                            {Humming bee pranayama}

{b} Anulome-vilome              {Alternate nostrilar pranayama}

{c} Om chanting

{d} Surya bhedna                   {Right nostrilar pranayama}

{e} Bhastrika                           {Bellow pranayama}

[4]Bandhas:-                                                                         {Bands}

{a} uddiyana bandha                  {Abdominal lock}

 [5]Mudras:                                                               {Finger –posture}

{a} Prithvi Mudra

 

Scientific explanation:-

You may have seen dwarfs acting as clowns in a circus .we laugh at them,though they have nothing to be merry about in life. They are the victims of pituitary and thyroid malfunctioning. In some the body refuses to grow, in others the mind: they remain like a child, physically and mentally. Sex characteristics are also determined by these glands.

The thyroid gland, which has the power to bestow longevity, youthfulness, incressing height, secretes its hormone straight into the blood stream. The chief ductless glands like the pituitary, the tiny pineal body ,the thyroid and parathyroid, control the other glands and other parts of the body. Though all these ductless glands are important for the proper running of the human machine .it is the thyroid which is very vital in incressing height. These glands, as we saw when dealing with Yogasana , secrete hormones without which the body will not work properly.

Further suggestion:-

The bone structure must remain elastic if one is to become taller. One must take exercise regularly. I suggest the following exercises will help one gain height:

  1. Stand in an open space in attention position. In hale deeply through the nose and extend yours arms lifting then slowly up to your shoulders. Keep your arms straight. Hold that position for
    some time and then take the arms backwards as far as they will go. No inhale again the release your breath slowly, resuming the former position.
  2. Stand with your arms straight at right angles to your body. Lift the arms vertically and then bring them to the level of the shoulders. Do not exhale in the process, but stand on your toes, lifting your heels as far as they will go. Exhale slowly after some moments and resume the earlier position.
  3. Extend your arms forward up to the level of the shoulders. Inhale and fill your lungs to about one-third of their capacity. Wait for a few moments and then take your arms above your head. Now move them in a circular motion-taking them behind your back and in the former position again. Exhale slowly.
  4. Forward Bend: To do this exercise stand straight with legs wide spread. Keep your hands up straight and then bend down forward and touch the floor with your hands, without breaking your knees, then return back to your original position.
  5. Spot Jump: Keep your legs close. Stand on your toe and start jumping with your hand straight up in the air for at least 2 minutes.
  6. Bar Hanging: Hold a bar that is at least 7 feet above the ground level (so that your foot doesn’t touch the ground when you hand on the bar with your arms straight). Now swing your body while hanging to the bar. Make sure you do not swing with the help of your wrist. Keep your spine straight while swinging.

Some other Exercises to Increase Height are:
Stretching – This exercise strengthens the muscles and reduces the compressions of the discs of the invertebrate. The cartilages of the spine become thick and lengthen it increasing the height.

Hanging – The effect of gravity on the body is that it compresses the spines and makes the tissues which support the structure become thinner. This gives an appearance of being short. Hanging counteracts to this affect by making the lower torso weight stretch the spine and decrease the pull on the vertebrate. The height is known to increase by one to two inches.

Procedure: A horizontal bar should be placed high enough so as to allow the entire body to extend. In case, the whole body cannot extend, it will suffice if the knees are bend slightly to allow hanging freely. While grasping the bar, the palms should face away and the thumbs must touch. If the arms, shoulders and hips are allowed to relax, the gravity effectively pulls the body further. Wearing ankle weights increase the benefits of this exercise to increase height. The process should lasts for 20 seconds at least followed by a gap and repeated three times for sure.

Dry Land Swim: It is also known as the Alternate Leg Kick and focuses on lower back. To perform this exercise, a person has to lay down flat on the stomach and extend the body completely.

Procedure: The arms should be stretched in the forward direction with the palms facing the floor. One arm should be lifted higher than the other, say the left arm is placed above the right. Keeping the legs in straight position, the right leg should be raised off the ground as much as possible. In the initial stages, this position should be maintained for at least 4 seconds before repeating the process on other leg. However, the aim should be to reach a stage where this position is continued for 20 seconds. In order to increase the effectiveness of this exercise to increase height, wrist and ankle weights can be added to the work out. It enhances the stamina and tone up the lower back muscles further.

Pelvic Shift: It is one of the favorite exercises to increase height for all fitness instructors. It is involves feeling of the spine and hips been stretched up and down quickly.

Procedure: The exercise begins by the person lying on the back with the shoulders and arms firmly placed on the floor. The knees should be bent and the feet should be brought as close to the buttocks a possible. The back should be now brought to an arch shape letting the pelvis to thrust upwards. This position is to be held for at least 20 seconds initially, later extending it for 30 seconds. Conclusion: As with any fitness regime, exercises to increase height should be carried out regularly to see the benefits within appropriate time frame.

Yogi Yoganand

 

 

 

 

 

 

 

Sticky
29 Sep 2020

Hypertension {High Blood Pressure}        

  •                           Hypertension  { High Blood Pressure }             

Definition

.               Hypertension is a disorder which causes the blood pressure to reach abysmally high levels. Persistent hypertension can lead to the development of fatal ailments, such as heart attacks, chronic renal failure and arterial aneurysm. It adversely affects the nervous system and several important body organs.

There are two types of hypertensions: Primary and secondary. Primary hypertension does not have many visible symptoms but secondary hypertension has prominent signs. It is more fatal in nature.

CAUSES

There is no specified cause of high blood pressure though it has often been traced to genetic origins. However, lifestyle and food habits often play a vital role in the development of hypertension.

  • People who lead a stress-ridden life and have hectic jobs become victims of hypertension.
  • Smokers and alcohol addicts are more prone to develop hypertension.
  • Intake of excess salt in food also leads to high blood pressure.

SYMPTOMS

  • The patients of hypertension complain of dizziness and intermittent headaches.
  • Some of them also suffer from symptoms like pain in the chest and palpitation.
  • Fatigue and breathing problems are two other prominent symptoms of hypertension.
  • The victims of high blood pressure also suffer from lack of sleep and become insomniac.

Etiology

The causes of high blood pressure vary and may include narrowing of the arteries, a greater-than-normal volume of blood, or the heart beating faster or more forcefully than it should. Any of these conditions will cause increased pressure against the artery walls. High blood pressure may also be caused by another medical problem. Most of the time, the cause is not known.

Yogic cure:-

                 [1] Shatkarma                             {Purificatory techniques}

{a} Sutra-neti{Nose-wash by string}

{b}Jala-neti   {Nose wash by water}

{c} Kapal-bhati {Lungs & brain-wash by breathing}

{d} Trataka{Eye –gazing for focussing purifying mind}

[2] Yogasana {Posture}

{a} Vajrasana {Adamantine}

{b} Paschimottanasana{Posterior stretch}

{c} Mayurasana{Peacock}

{d} Trikonasana {Tringle}

{e} Shavasana {Corpse}

{f} Supta-vajrasana {Lying adamantine}

{g} Padmasana {Lotus}

{h}Matsyendrasana {Spinal twist}

{i} Halasan {Plough}

{j} Virasana  {Hero’s pose}

{k}Sidhadhasan  {Perfect }

{l} Pawanmuktasana  {Pawan reliving pose}

{m} Tadasana   {Palmyra}

                   {n} Konasana {Tringle}     

                   {o} Ekpadottanasana

                   {p} Bhujangasana{Cobra}

                   {q} Shalbhasana {Locust}        

                   {r} Vakrasana

                   {s} Merudandsanchalana {Spinal movement posture}              

                   {t} Setubandhasana

                   {u} Balasana.

  [3] Pranayama                   {Body- mind enersing breathing practices}

{a} Anulome-vilome                   {Alternate nostrilar pranayama}

{b} Nadi shodhana                      {Psychic network purification}

{c} Bhramari                               {Humming bee pranayama}

{d} Sheetkari                               {Folded tongue pranayama}

{e} Ujjayi                                    {Hissing pranayama}

[4] Bandhas:- {Bands}

{a} Moolabandha    {Anal lock}

[5] Mudras:           {Finger –posture} 

{a} Meyo mudra

{b} Vyanvayu mudra

{c} Apanvayu mudra

[6] Dhyana:-  

Home remedies:-

  • Add a teaspoon of honey and 5-8 drops of apple cider vinegar to a cup of hot water, and drink it in the early morning. It helps to reduce cholesterol, maintains vasodilation, and helps to regulate blood pressure.
  • Mix 2 parts of orange juice with 1 part of coconut water. Drink 1/2 to 1 cup, twice or thrice a day.
  • Add 1 teaspoon coriander and 1 pinch cardamom to 1 cup freshly squeezed peach juice. Drink this juice 2 or 3 times a day.
  • Take 1 tablespoon fresh Indian gooseberry (amla) juice with 1 tablespoon of honey every morning.
  • Boil 5-6 leaves of olive in a cup of water for five minutes. Drink a cup of this decoction 3 times a day.
  • Drink 1 cup mango juice, followed about an hour later by 1/2 cup warm milk, with a pinch of cardamom, a pinch of nutmeg, and 1 teaspoon ghee. (Note: Skip the ghee, if the cholesterol level is high.).

Scientific appraisal in favour of yoga:-

The relaxation and exercise components of yoga have a major role to play in the treatment and prevention of high blood pressure (hypertension). A combination of biofeedback and yogic breathing and relaxation techniques has been found to lower blood pressure and reduce the need for high blood pressure medication in people suffering from high blood pressure. In 20 patients with high blood pressure who practiced biofeedback and yoga techniques, five were able to stop their blood pressure medication completely, five were able to reduce significantly the amount of medication they were taking, and another four had lower blood pressure than at the beginning of the three-month study.

Precautions

  Chakrasana, Sarvagasana should be avoide

Never to be practiced after meal.

Make sure you inhale and exhale very slowly.

Further suggestion:-

Following a healthy lifestyle is thus the best and safest way to control blood pressure so as to say. Such lifestyle practices are natural, poses little health risk and are absolutely cost-free.

  • Try to have fruits and vegetables that are rich in potassium, magnesium and calcium like potatoes,bananas,driedapricots,orange,nuts, seeds, dried beans and peas.
  • Reduce the intake of salt in your diet. avoid adding salt at the table.
  • Also try to control caffeine (ingredient in coffee) and sugar as both can increase the amount of potassium that is excreted by the kidney.
  • Try to avoid canned food.
  • To remain healthy, stay happy. Those who take stress all the time tend to develop health problems much faster than those of happy disposition. Happiness is thus essential for good health, Laugh out loud daily and release all the tensions.
  • Do regular exercise for at least 30 to 45 min. daily. It will help reduce your blood pressure.
  • Control your Weight. See your don’t become overweight.
  • Remember old saying you are what you eat. Your meal can certainly affect your BP. Eat healthy diet.
  • Totally avoid alcohol, caffeine and tobacco. To start with, reduce the numbers of cigarettes you smoke each day.
  • Most important of all is to reduce stress level. For this first try to identify your major stressors, then try to reduce them or at least try to cope with them in a healthier way.
  • Practice daily Yoga posture and Pranayama to maintain a healthful body weight and improve muscle tone.
  • Try to put two drops of Almond Oil or Cow’s Pure Ghee in both the nostrils twice every week.
  • Try to maintain balance between mental and physical stress and work.
  • Maintain regular sleep pattern. Go to sleep and wake up at the same time each day. It has a very healthy influence on inner bio-clock maintaining various rhythms of body.

Remember these are not the changes which you can’t incorporate in your daily life. These healthy changes will offer significant rewards in your life.

When your blood pressure in under control you risk of life threatening complications will markedly decrease and you will live a happier and longer life.

Yogi Yoganand

Marketing By StartStage